तू पूछता है न मुझसे तू क्या है मेरा।।
तू वो मंजिल है जिस तक जाने की चाहत हर रास्ते पे बढ़ने से पहले।।
जैसे हर रास्ते पे और जो बी हासिल हो वो तुम ही।।
तुम खुदा से भी कीमती क्योंकि तुम्हे एक दिन भी याद किये बिना न रहे,,हाँ इबादत जरूर भूली मैंने।।
जूनून की हद् तुम से,,मंजिल से सुकून तुम तक।।
मेरी रूह में शामिल है तुम्हारी मौजदूगी का एहसास।।
मुझे तेरी कमी कुछ इस तरह आजमाती है कि साँसे भी रुकने लगती हैं अगर तू आस पास न हो।।
तुम्हारी आगोश का वो सुकूँ शायद दुनिया में कहीं नहीं।।
तुमसे मिला दर्द भी सारे आँखों पर।।
मेरी हर दुआ में तुम्हें हासिल करने की चाहत,,हर ईमान तुमसे जुड़ा,,हर ख्वाहिश की शख्सियत तुमसे,,हर सुकूँ का अक्स तुम।।
तेरी मौजूदगी ज़िन्दगी का दूसरा नाम है।।
एकतरफा ये सफर मेरा हर मुकाम से खुबसूरत है।।
अधूरी ख्वाहिशें जो कामयाब होने की चाहत में रोज़ सजती हैं,,कि एक दफा कब तुम्हारी नज़र पड़ेगी और ये सुहागन हो जाएँगी।।
क्या अब भी तुझे जानना है कि तू क्या है मेरा ।😊