कोशिश करता हूँ देखने की उन मासूम बच्चों के नज़रिये से ,

जो घूमते हैं पटरियों पर किसी लावारिस की तरह ,

दुनिया उनके लिए भी यही है जो मेरे लिए है ,

फिर ऐसा क्यों …..?

इन्हें कर्मों का खेल कहूँ , या अनपढ़ ता इनके माँ बाप की , जिन्होंने छोड़ दिया पैदा करके इन्हें,

इस उम्मीद मे की एक कमाई का ज़रिया बनेंगे , ना सोचते हुए की ये खायेंगे क्या पियेंगे क्या ,

जिस उम्र में खेलना चाहिये बच्चे को , थमा दिया कटोरा हाथ में इनके , जैसे कोई खिलौना हो ,

जहाँ जाता है अब यही कहता है , कुछ दे दे बाबा,

इन्हें ये तक नही पता , कि भीख कहते किसको हैं,

कोई खेल दिखाता है  , कोई शर्ट से ही जूते साफ़ कर देता है,

झिड़क पड़ने पर भी ख़ुशी-ख़ुशी लौट जाते हैं उछलते कूदते ,

जैसे कुछ हुआ ही नाहो,

हर मुसाफिर के पाँव में गिर जाते हैं , गाडी साफ़ करते हैं इस उम्मीद में कि शायद दो पैसे मिलेंगे और वही दे देंगे माँ बाप को ,

बस यही काम था इनका जो कर दिया इन्होंने,

माटी से सने हुए बदन की परवाह नहीं इन्हें , बस ये वो सब करना चाहते हैं , जो इन्हें ख़ुशी दे,

एक मैं हूँ जो कोसता हैअपनी किस्मत को , अपने ख़ुदा को ,

रोता हूँ अपनी बेबसी पे कि कुछ चीज़े न हीं हैं मेरे पास ,

 

लेकिन शायद यही बच्चे कुछ सिखा गए मुझे ,

जब मेट्रो पे खड़ा निहार रहा था इनको ,

फटी हुई शर्ट डालकर भी खुश था कोई ,

कोई इश्तिहार के फ्रेम पे चढ़ के करतब कर रहा था ,

ज़मीन तब खिसकी जब देखा कि उसी फ्रेम पे कपडे बाँध के ,

बिस्तर बनाया हुआ है  ,

इतनी ठण्ड में बदन पे बिना कपडे कोई कैसे खुश रह सकता है ?

ऐसे ही कई सवाल घूम रहे थे मन में ,

कि अचानक एक ख्याल घर कर गया ,

 

खुश रहने के लिए किसी सबब कि ज़रुरत नहीं ,

यूँभी तो खुश रहा जा सकता है ………

 

जो है उसे एहसास कर के , उसी में जीके ,

 

सच ,उस दिन वो बच्चे बहुत कुछ सिखा गए

 

SHARE
Previous articleDarbara Singh- The story of a ruthless serial killer
Next articleWHY ARE YOU MIGRATING?
Techie by Qualification............. Writer by Heart.......... Seeker of Wisdom........... Emotional Think Tank........... Life unveils new treasures everyday........... Grab it...............Enjoy it..................Cherish it